बुझने लगा है झीलों का पानी, पिघला है, शाम के सूरज का सोना।
कहाँ से थामूं रात की चादर, कहाँ से पकड़ूं धूप का कोना॥
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आँख को क्षितिज पर डूबता सूरज लाल दिखायी देता है।
लेकिन कैमरा कहता है कि सूरज वैसा ही है, जैसा कि दोपहर मे होता है।
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९ जून २००७ को ८:३२ अपरान्ह पर 'चिवितानोवा आल्ता' से डूबते हुये सूरज पर दिखती रक्त्त वर्ण आभा।












It is Commonly Known as Garden Snail and Classified as follows:


